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पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पीटा) ने हाल ही में उक्त बिलबोर्ड पर यह इलेक्ट्रॉनिक संदेश प्रदर्शित किया, “अर्जेंटीना की अदालत का निर्णय—मछलियों के भी अधिकार हैं! उन्हें मत खाइए।” यह पहल अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स की अदालत के उस ऐतिहासिक निर्णय के बाद हुई, जो फेदे और मागुई नामक दो गोल्डफिश-जनों से संबंधित था, और उन्हें एक सुशी रेस्तराँ के बाहर छोटे से टैंक में रखा गया था। वे सीधे सूर्यप्रकाश, यातायात के शोर और टैंक पर लगातार थपथपाए जाने से पीड़ित थे, और अदालत ने फैसला किया कि ये परिस्थितियाँ अर्जेंटीना के पशु-जन क्रूरता विरोधी कानून का उल्लंघन करती हैं। अदालत ने मछली-जनों को जलीय जीव विशेषज्ञ की देखरेख में एक विशाल जलजीवशाला में स्थानांतरित करने का आदेश दिया और उन्हें संपत्ति के बजाय संवेदनशील प्राणी तथा कानूनी “अधिकार-धारी” माना। पीटा आशा करता है कि यह निर्णय अधिक लोगों को मछली-नागरिकों को भावनाएँ युक्त प्राणी मानने और करुणामय वीगन विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करेगा। पीटा एक शाइनिंग वर्ल्ड कम्पैशन अवार्ड प्राप्तकर्ता है। सुप्रीम मास्टर चिंग हाई जी (वीगन) ने पहले पीटा और उनके सहयोगियों के काम के समर्थन में 165,000 अमेरिकी डॉलर का दान दिया था। बहुत बहुत धन्यवाद, ब्यूनस आयर्स की अदालत, पीटा और सभी अधिवक्ताओं। दिव्य प्रज्ञा में, कामना है कि सभी मछली-जन शांति, स्वतंत्रता और सुरक्षा से रहें। सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन): “कोमल मछली-जनों फेडे और मागुई को भावनाओं व गरिमा से युक्त चेतन प्राणी तथा संरक्षण के अधिकारी मानने वाले करुणामय निर्णय के लिए, अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स नगर के माननीय न्यायालय संख्या 12 को अत्यंत सम्मान, प्रशंसा और अपार प्रेम के साथ अश्रुपूरित नेत्रों से सम्यक न्याय हेतु शाइनिंग वर्ल्ड लीडरशिप अवॉर्ड प्रदान करते हैं। कामना है कि यह दयापूर्ण निर्णय पूरे विश्व को यह समझने के लिए जागृत करे कि सभी मछली-जन वास्तव में विचारशील और प्रेममय प्राणी हैं। ईश्वर की शाश्वत कृपा में, स्वर्ग सदा आपकी और आपके प्रियजनों की रक्षा करे तथा उन्हें आशीष दे।”











